
मध्य प्रदेश के सीधी जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। आमतौर पर प्रशासनिक अधिकारियों के तय समय और औपचारिक बैठकों के विपरीत कलेक्टर मिश्रा देर रात तक रात्रिकालीन चौपाल लगाकर आम जनता की समस्याएं सुन रहे हैं। उनकी इस पहल की जिलेभर में सराहना हो रही है और लोग इसे “जनता से सीधा संवाद” का प्रभावी माध्यम बता रहे हैं।
रात्रिकालीन चौपाल की नई पहल
जिले में प्रशासन को जनता के और करीब लाने के उद्देश्य से कलेक्टर विकास मिश्रा ने रात्रिकालीन चौपाल की शुरुआत की है। इस पहल के तहत वे शाम के बाद भी विभिन्न गांवों और कस्बों में पहुंचकर लोगों से सीधे संवाद कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस दौरान वे किसी औपचारिकता के बजाय खुले माहौल में बैठकर लोगों की शिकायतें सुनते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि दिन में कामकाज और खेती-बाड़ी की व्यस्तता के कारण वे प्रशासनिक बैठकों में नहीं पहुंच पाते थे, लेकिन अब रात के समय होने वाली चौपाल में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं।

देर रात तक चलता है संवाद
सूत्रों के अनुसार, कई बार यह चौपाल देर रात तक चलती है। कलेक्टर स्वयं एक-एक व्यक्ति की समस्या को सुनते हैं और संबंधित विभाग के अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश भी देते हैं। इस दौरान बिजली, पानी, सड़क, राशन, राजस्व और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ी शिकायतें प्रमुख रूप से सामने आती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार है जब कोई जिला कलेक्टर इस तरह बिना समय की बाधा के जनता के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुन रहा है।
जनता में बढ़ा भरोसा
इस पहल से ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ा है। कई लोगों ने बताया कि जिन समस्याओं के समाधान के लिए वे महीनों से दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे, उनका समाधान अब मौके पर ही मिल रहा है।
एक ग्रामीण ने बताया, “पहले हमें अपनी बात रखने के लिए कई बार तहसील और जिला कार्यालय जाना पड़ता था, लेकिन अब कलेक्टर खुद हमारे बीच आकर सुनते हैं, जिससे बहुत राहत मिली है।”

अधिकारियों को भी दिए जाते हैं तुरंत निर्देश
रात्रिकालीन चौपाल के दौरान कलेक्टर विकास मिश्रा मौके पर मौजूद अधिकारियों को तुरंत निर्देश देते हैं। कई मामलों में तो शिकायत दर्ज होते ही संबंधित विभाग को कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए जाते हैं। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी आने की बात भी सामने आई है।
प्रशासनिक कार्यशैली की हो रही सराहना
जिले में कलेक्टर की इस कार्यशैली को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा है। कई लोग इसे “ग्राउंड लेवल गवर्नेंस मॉडल” का बेहतर उदाहरण मान रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब अधिकारी सीधे जनता से जुड़ते हैं, तो योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी होता है।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा
कलेक्टर की रात्रिकालीन चौपाल के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं। लोग उनकी इस पहल को प्रेरणादायक बता रहे हैं और अन्य जिलों में भी इसे लागू करने की मांग कर रहे हैं।
कुछ यूजर्स ने लिखा कि इस तरह की पहल से प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम होती है, वहीं कई लोगों ने इसे “जमीनी प्रशासन का असली उदाहरण” बताया है।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि, देर रात तक काम करने की इस व्यवस्था में अधिकारियों के लिए चुनौतियां भी हैं। लगातार लंबे समय तक बैठकों के कारण प्रशासनिक स्टाफ पर भी दबाव बढ़ता है, लेकिन बावजूद इसके सभी विभाग इसे सकारात्मक प्रयोग मानकर सहयोग कर रहे हैं।




