
इंदौर। जिले में गेहूं खरीदी को लेकर किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी में हो रही देरी, पंजीयन और गुणवत्ता जांच में सख्ती तथा व्यवस्थाओं की कमी से परेशान किसानों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। गुस्साए किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट का घेराव किया और चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
यह प्रदर्शन केवल एक दिन की नाराजगी नहीं था, बल्कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का परिणाम था। किसानों का कहना है कि हर साल गेहूं खरीदी के समय उन्हें इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
खरीदी में देरी से बढ़ी परेशानी
किसानों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि गेहूं खरीदी प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हो पाई या जहां शुरू हुई भी है, वहां गति बहुत धीमी है। कई किसानों ने बताया कि वे कई दिनों से अपनी उपज लेकर खरीदी केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी फसल की तौल नहीं हो पा रही है।
खेतों से गेहूं निकालने के बाद उसे लंबे समय तक खुले में रखना किसानों के लिए जोखिम भरा होता है। अचानक मौसम बदलने या बारिश होने पर फसल खराब होने का खतरा रहता है। इसके अलावा, बार-बार ट्रॉली में अनाज लाने-ले जाने से परिवहन लागत भी बढ़ जाती है।
किसानों का कहना है कि यदि खरीदी समय पर नहीं हुई, तो उन्हें मजबूर होकर अपनी उपज कम दाम पर व्यापारियों को बेचनी पड़ेगी, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
गुणवत्ता जांच में सख्ती पर सवाल
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने खरीदी केंद्रों पर हो रही गुणवत्ता जांच (क्वालिटी टेस्ट) में अत्यधिक सख्ती का भी मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि मामूली कारणों से भी उनके गेहूं को रिजेक्ट कर दिया जा रहा है।
किसानों के अनुसार:
- नमी (मॉइश्चर) के नाम पर अनावश्यक आपत्ति लगाई जा रही है
- दानों के आकार या रंग को लेकर भी आपत्ति की जा रही है
- कई बार मानकों की स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी जाती
इससे किसानों को बार-बार अपनी फसल वापस ले जानी पड़ती है और दोबारा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उनका कहना है कि प्रशासन को व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, न कि अत्यधिक कठोरता दिखानी चाहिए।
पंजीयन और टोकन व्यवस्था में गड़बड़ी
कई किसानों ने पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) और टोकन सिस्टम में अव्यवस्था की शिकायत की। उनका कहना है कि:
- ऑनलाइन पंजीयन में तकनीकी समस्याएं आ रही हैं
- टोकन मिलने में देरी हो रही है
- जिन किसानों को पहले टोकन मिलना चाहिए, उन्हें बाद में बुलाया जा रहा है
इस अव्यवस्था के कारण किसानों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ किसानों ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना भी बढ़ जाती है।
कलेक्ट्रेट का घेराव और प्रशासन को चेतावनी
गुस्साए किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। किसानों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए, जिससे स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई। हालांकि, प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को जल्द सुलझाने का आश्वासन दिया।
किसानों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी कई मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं:
- गेहूं खरीदी प्रक्रिया को तेज किया जाए
- गुणवत्ता जांच में अनावश्यक सख्ती खत्म की जाए
- सभी खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं
- पंजीयन और टोकन व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए
- किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए
किसानों का कहना है कि यदि इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रशासन ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि खरीदी प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार:
- खरीदी केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है
- कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है
- तकनीकी समस्याओं को दूर किया जा रहा है
हालांकि, किसानों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर सुधार दिखना चाहिए।
समर्थन मूल्य और आर्थिक दबाव
गेहूं की खरीदी सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाती है, जो किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह होता है। यदि समय पर खरीदी नहीं होती, तो किसानों को बाजार में कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ती है।
इस स्थिति में किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है। कई किसान पहले से ही कर्ज में डूबे होते हैं, ऐसे में खरीदी में देरी उनकी समस्याओं को और बढ़ा देती है।
संभावित आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। इसमें सड़क जाम, धरना-प्रदर्शन और अन्य विरोध कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं।
ऐसे आंदोलन का असर न केवल प्रशासन पर पड़ेगा, बल्कि आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
व्यापक परिप्रेक्ष्य
यह मुद्दा केवल इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि गेहूं खरीदी व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह एक बड़े किसान आंदोलन का रूप ले सकता है।



