रामपुर (उत्तर प्रदेश)। बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश गए एक युवक की मौत की दर्दनाक खबर सामने आई है। रामपुर जिले के मसवासी गांव निवासी 22 वर्षीय शावेद का शव शनिवार को भारत लाया गया, जिससे पूरे परिवार में मातम छा गया।
परिजनों के अनुसार, शावेद रोज़गार की तलाश में जून 2025 में रूस गया था। शुरुआती दिनों में वह वहां स्टील फर्नीचर से जुड़ा काम करता था और एक हॉस्टल में रह रहा था। लेकिन कुछ समय बाद परिस्थितियां बदल गईं।
बताया जा रहा है कि गुरुवार को ड्यूटी के दौरान गोली लगने से उसकी मौत हो गई। शनिवार तड़के उसका शव दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, जहां से परिजन उसे लेने पहुंचे।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
शावेद अपने परिवार का इकलौता सहारा था। उसके पिता दुल्हे हसन दूध बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। छोटा भाई मानसिक रूप से अस्वस्थ है, जबकि बहन पढ़ाई कर रही है। ऐसे में शावेद के विदेश जाने से परिवार को आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद थी।
रहस्यमयी हालात में हुई मौत
परिजनों का कहना है कि शावेद के साथ हल्द्वानी निवासी एक युवक भी रूस गया था, जो कुछ समय बाद वापस लौट आया था। सितंबर 2025 के बाद से शावेद का संपर्क परिवार से लगभग टूट गया था। आखिरी बार हुई बातचीत में वह परेशान और घबराया हुआ लग रहा था।
परिजनों ने जनवरी 2026 में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार भी लगाई थी, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।

अचानक आया मौत का संदेश
2 अप्रैल 2026 को परिजनों को एक कॉल प्राप्त हुई, जिसमें खुद को रूसी सेना का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने जानकारी दी कि शावेद की मौत पहले ही हो चुकी है और उसका शव भारत भेजा जा रहा है।
आर्मी में शामिल किए जाने का दावा
परिवार का आरोप है कि शावेद को उसकी जानकारी के बिना रूसी सेना में शामिल कर लिया गया था। उन्होंने बताया कि उसने एक बार सेना की वर्दी में अपनी तस्वीर भी भेजी थी, जिससे यह आशंका और गहरा गई।



